
नेक कामों का पर्याय बना नेक कमाई फाउंडेशन
परिचय-
नेक कमाई फाउंडेशन पांच वर्षों से समाजिक सेवा और जागरुकता के एतिहासिक कार्य कर रहा है। नेक कमाई फाउंडेशन की स्थापना 2020 में जागरूक और समाजसेवी एक विचार धारा के लोगों ने की। शुरू में इसके कार्य कोरोना में राशन किट वितरण, घरों में काम करने वाली महिलाओं की सहायता सहित गरीब व जरूरतमंद परिवारों को संबल प्रदान की गई।
नेक कमाई ने 2022 में गरीब व घरों में झाडू पोचा लगाने वाली बेटियों की पहचान कर उनमें स्किल डवलप किया ओर उन्हें काम सिखाया। इससे वो स्वावलंबी बनी और बाद में उनकी शादी करने तक का जिममा उठाया। ऐसी 251 बेटियों का कन्यादान किया।
नेक कमाई का नाम तो जैसे सेवा से ही जुड़ गया। समाज में जहां भी जिसे भी मुसीबत में जरूरत पड़ी तो उसने नेक कमाई को ही पुकारा। अलवर जिले में नेक कमाई फाउंडेशन प्रतिदिन सेवा भावी कार्य कर रहा है। इनमें गरीब बेटियों का विवाह, जरूरतमंद बेटियों को स्वावलंबी बनाने के लिए उन्हें सिलाई व अन्य उद्योगों का प्रशिक्षण देने, घरेलू महिलाओं से स्वयं सहायता के माध्यम से जूट, कागज व मिट्टी के उत्पाद बनवाना और उन्हें बाजार उपलबध कराना, सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं को बढ़ाने के लिए संसाधन उपलबध कराना, आंगनवाड़ी केन्द्रों पर जाकर बालकों को कपड़े व उपहार देना, सर्दियों में गर्म कपड़ों का वितरण, गर्मियों में ठंडा पानी व शर्बत पिलाना जैसे काम किए जा रहे हैं। समाज में गरीब लोगों के जीवन में स्थाई परिवर्तन आए , इसके लिए भीख मांगने वालों की बस्ती में बच्चों के लिए शाम की कक्षाएं संचालित हो रही हैं जिससे उनके जीवन में परिवर्तन आया है। इनको संस्कारित बनाया जा रहा है जिसके चलते इन केन्द्रों का नाम संस्कार शिक्षा वृक्ष रखा गया है।
इसी प्रकार चिकित्सा शिविर के साथ रकतदान शिविर भी लगाए जा रहे हैं। पर्यावरण की रक्षा के लिए लोगों को निशुल्क कपड़ों के थैले वितरित किए जा रहे हैं तो वहीं पौधरोपण अभियान में 5100 पौधें लगाए गए। इस प्रकार नेक कमाई फाउंडेशन हर क्षेत्र में कार्य कर रहा है जिससे समाज में बदलाव आए।
नेक कमाई की ओर से दिन में दुकानों में काम करने वाले बाल श्रमिक और भीख मांगने वाले बच्चों के लिए शाम को अतिरिकत कक्षाएं शुरू की हैं जिससे उनमें बदलाव आया है। यही नहीं नेक कमाई गरीब व जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई व बयूटी पार्लर का निशुल्क प्रशिक्षण दे रहा है।










