बदलाव:
हाथ में कटोरा नहीं अब थामी कलम
- बदलाव की अलवर में बहार
अलवर.अलवर शहर की कच्ची बस्तियों में नियमित स्कूल नहीं जाने वाले और श्रम करने वाले बच्चों के लिए संस्कार शिक्षा वृक्ष नाम से कक्षाएं संचालित हो रही हैं। इन कक्षाओं को नेक कमाई फाउंडेशन ने शुरू किया है। इन कक्षाओं में बेहतर परिणाम आ रहे हैं। ये वो बच्चे हैं जो भीख मांगते थे लेकिन अब इनके जीवन में बदलाव आया है और इन्होंने कटोरे की जगह कलम को थामा है।
कच्ची बस्तियों में रहने वाले बच्चों को बेहतर भविष्य देने के उद्देश्य से नेक कमाई फाउंडेशन ने एक नई पहल शुरू की है। उन बच्चों के लिए, जो नियमित स्कूल नहीं जाते या श्रम करते हैं। फाउंडेशन ने संस्कार शिक्षा वृक्ष नाम से नि:शुल्क कक्षाएं शुरू की हैं।
शिक्षा के साथ दे रहे हैं संस्कार-
इन कक्षाओं को जयपुर की संस्था सुमेधा के सहयोग से संचालित किया जा रहा है । इनमें बच्चों को न केवल पढ़ाई-लिखाई सिखाई जा रही है, बल्कि उन्हें अंग्रेजी बोलने की कला और अन्य कौशल भी सिखाए जा रहे हैं।
फाउंडेशन के संरक्षक दौलत राम हजरती का मानना है कि शिक्षा ही बच्चों को गरीबी के दुष्चक्र से बाहर निकालने का सबसे प्रभावी साधन है।
शुरुआती नतीजों में इन कक्षाओं ने अच्छे परिणाम दिखाए हैं। कच्ची बस्तियों के ये बच्चे अब आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई कर रहे हैं और फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने का सपना देख रहे हैं। फाउंडेशन ने बताया कि बच्चों और उनके परिवारों का भी सकारात्मक रुझान मिल रहा है।
यह पहल केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के नैतिक और व्यावसायिक विकास पर भी केंद्रित है। मुखय कोर्डिनेटर अभिषेक तनेजा ने बताया कि फाउंडेशन का लक्ष्य इन बच्चों को एक ऐसे मुकाम तक पहुंचाना है, जहां वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में सममानपूर्वक जीवन जी सकें।
यहां बच्चों को उनकी उम्र और क्षमता के अनुसार शिक्षण सामग्री दी जाती है।
फाउंडेशन विशेष रूप से उन बच्चों को प्राथमिकता देता है, जो भीख मांगने या बाल श्रम में लगे हैं। यह प्रयास न केवल बच्चों के जीवन को बदलने की दिशा में एक कदम है, बल्कि समाज के प्रति एक महत्वपूर्ण संदेश भी है कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है। यहां 100 से अधिक बच्चों के जीवन में बदलाव आ रहा है।

