एक ऐसा शहर जिसमें बेटियों की शादी की चिंता हुई खत्म

एक ऐसा शहर जिसमें बेटियों की शादी की चिंता हुई खत्म
-एक ऐसी संस्था जो बेटियों की शादी करता है
अलवर.
बेटियों के जन्म के साथ ही माता- पिता उसकी शादी की चिंता करने लगते हैं। राजस्थान के अलवर शहर में एक संस्था नेक कमाई फाउंडेशन ने बेटियों की शादी की चिंता को कम कर दिया है। यह संस्था दो साल में ही 251 बेटियों का कन्यादान कर चुकी है।
नेक कमाई फाउंडेशन ने पहला कन्यादान 2022 के अगस्त माह में दीवाकरी गांव में किया। जिस बेटी का कन्यादान किया उसके पिता की असाध्य बीमारी से हालत खराब थी जबकि मां घरों में काम करती थी।
इसकी पहली सूचना संरक्षक मीना तनेजा को मिली और हमारी टीम ने उसका जाकर घर देखा। यहां इनके घर की हालत ठीक नहीं थी तो हमने यह कन्यादान करने का निर्णय लिया। इस लडक़ी की शादी में करीब चार लाख का सामान आया जिसमें महंगी वाशिंग मशीन, घड़ी सहित सभी घरेलू सामान था।
बिना चंदे के काम करती है नेक कमाई-
इस कार्य में किसी प्रकार का चंदा नहीं लिया जाता है। कन्यादान के लिए सभी सदस्यों ने अपना-अपना सामान तय कर रखा है कि किस व्यकित को कया देना है। कोई गैस का चूल्हा देता है तो कोई साडियां। इसमें किसी प्रकार का चंदा नहीं लिया जाता है और सब अपनी मर्जी से कन्यादान का सामान देते हैं।
नेक कमाई फाउंडेशन की स्थापना कोरोना काल में हुई जब घरों में काम करने वाले महिलाओं के सामने पेट भरने का संकट आ गया। ऐसे में कुछ लोगों ने हमने बैठकर इसको बनाया और शहर में ऐसी महिलाओं को राशन किट वितरित किए। धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता गया और कन्यादान के साथ सरकारी स्कूलों में संसाधन उपलबध करवाना, गर्मियों में शीतल पानी व शर्बत का इंतजाम, सर्दियों में गर्म कपड़ों का वितरण सहित बहुत से कार्य किए जाते हैं।नेक कमाई की महिलाओं की टीम गरीब बेटियों की सूचना आने पर उसके घर जाकर पूछताछ करती है जिसमें मीना तनेजा, मंजू चोधरी अग्रवाल, उमा बजाज, कुंती अग्रवाल, सोनिका अरोड़ा व प्रवीन बत्रा होती हैं।
सर्वें के बाद करते हैं शादी-
टीम के सर्वे के बाद उसकी उम्र व पते से संबंधित आधार कार्ड लिए जाते हैं। समाज में कौन सी बेटी का जरूरत है जिसके लिए अब बेटियां स्वयं ही संपर्क करने लगी है जबकि समाज के जागरूक लोग हमारी संस्था के पदाधिकारियों के नंबर दे देते हैं।
संरक्षक दौलत राम हजरती स्वयं उनके घर जाकर अंत में पूरी जानकारी लेते हैं। मुखय कोर्डिनेटर अभिषेक तनेजा हैं जबकि कन्यादान की टीम में सोरभ कालरा, डा. आशुतोष शर्मा, गुरप्रीत सिंह, परमजीत सिंह गोगिया, अजय आनंद गोयल, डा. सत्यभान यादव, अनुपम चोधरी अग्रवाल, सुरेश गुप्ता, अशोक सिंघानिया, सीए सुशील बंसल, कुमकुम कपूर, निष्ठा कालरा, तारेश जोरवाल आदि हैं। इसमें निष्ठा कालरा, दिव्यांशी, तारेश जोरवाल, सोरभ कालरा जैसे युवा भी है जो इस कार्य को संभालते हैं।
बेटियों को बनाते हैं स्वावलंबी- अलवर शहर में गुरुनानक कॉलोनी व मूर्ति कॉलोनी में महिलाओं के लिए दो सिलाई व अन्य व्यवसायों का प्रशिक्षण देने के लिए सेंटर चल रहे हैं। इनमें गरीब बेटियों को नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां प्रशिक्षण पर आने वाली बेटियों का विवाह तक किया जाता है। उदाहरण-
दो साल में नेक कमाई ने 251 कन्यादान किए हैं। इनमें सारी बेटियां ऐसी होती हैं जिनके घर में पेट भ्भरने का भोजन तक नहीं होता है। कई बार ऐसी बेटियों की शादी की जिनके परिवार में एक भी कमाने वाला नहीं है। हसन खां के समीप कच्ची बस्ती की एक ऐसी लडक़ी की शादी की जो पिता व भाई की मौत के बाद नानी के पास आई तो दोनों मामा मर गए। ऐसे में नानी और वे लडक़ी घरों मेें काम करने लगी। नेक कमाई ने इस बेटी की शादी की।

इस संगठन की सबसे बड़ी नेक कमाई एक साल में 250 से अधिक सेवा भावी कार्यक्रम करता है यानि हर तीसरे दिन कुछ ना कुछ सेवा कार्य होता है।
यहां सब लोग मिलकर कार्य करते हैं शादियां-
2022-23 में- 5020
23-24 में – 160
पैमाना आर्थिक स्थिति का-
इसमें प्रथम प्राथमिकता उनको दी जाती है जिनके पिता नहीं है या घर में कोई कमाने वाला सदस्य नहीं है। हम अधिकतर घरों में झाडू पोचा लगाने वाली लड़कियों की ही करते हैं जिसमें कोई जाति व संप्रदाय नहीं देखा जाता है।नेक कमाई फाउंडेशन का उददेश्य इस कार्यक्रम के पीछे यह है कि बेटियां समाज की सांझा होती है। कोई बेटी अपनी शादी के सपने संजोती है तो हमारा फर्ज है कि उसकी डोली अच्छे तरीके से विदा हो। गरीब लोग बेटी की शादी के लिए अपना मकान गिरवी नहीं रखे। हम उसको स्वावलंबी बनाने वाला सामान जैसे सिलाई मशीन जरूर देते हैं। ऐसी बेटियों को शादी के बाद भी पढ़ाया तक जा रहा है और उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इन बेटियों को घरेलू आवश्यकता का सामान दिया जाता है जिससे वह सुखद जीवन बीता सके। वो जिस घर में जाती है तो वह भी गरीब ही होते हैं। ऐसे में समाज का दायित्व है कि बेटियों को यह सामान दिया जाए। संरक्षक की भूमिका में दौलत राम हजरती, मंजू चौधरी अग्रवाल व मीना तनेजा हैं।
मुखय कोर्डिनेटर अभिषेक तनेजा है जिनके नेतृत्व में यह कार्यक्रम होते हैं।

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